विकास से हटकर, प्याज पर गहराई राजनीति


सिमरन कनौजिया ,  नई दिल्ली 


विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही राजनीतिक पार्टियों को यदि कुछ न मिला तो वे प्याज पर राजनीति करने लगे। प्याज सौ रूप्ये किलो होने से जहां एक ओर जनता की मुश्किले बढ चुकी है। वही दिल्ली सरकार केंद्र को व केंद्र सरकार इसका जिम्मेदार दिल्ली सरकार को ठहरा रही है। यह आरोप -प्रयारोप का सिलसिला इस कदर चल रहा है कि दोनों पार्टियां अपने वास्तिविक मुददों से भटक चुकी है। 
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि अरविंद केजरीवाल हमेशा की तरह जनता को गुमराह करने में लगे हुए है। वहीं पलटवार करते हुए केजरीवाल सरकार कह रही है कि केंद्र सरकार ने प्याज की आपूर्ति बंद की है जिससे दाम बढ़ रहे हैं । 
बढ रहे प्याज के दामों के लिए चाहे कोई भी सरकार जिम्मेदार क्यों न हो, लेकिन इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड रहा है। 
सरकार चाहे केंद्र की हो या दिल्ली सरकार हो, जनता को रोजगार देने में विफल रही है। उपर से बढते खादय पदार्थों की कीमत ने लोगों की कमर तोड कर रख दी है। ऐसे में यदि सरकारें भी रोजगार व विकास की नीति से हटकर एक प्याज पर राजनीति करेंगी, तो सरकार जनता कहां जाएगी?