बोर्ड परीक्षाओं का महाकुम्भ प्रारम्भ हो चुका है


स्वतंत्र सिंह भुल्लर नई दिल्ली


बोर्ड परीक्षाओं का महाकुम्भ प्रारम्भ हो चुका है और जैसे जैसे परीक्षा पास आतीं है छात्र तनाव लेना शुरू कर देते है और यह एक तरह से ठीक भी है क्योंकि यही वो समय है जब पूरे वर्ष की मेहनत को परिणाम में बदलने को छात्र ललायित रहतें है। 
 परंतु अत्यधिक तनाव एवं चिंता करना परीक्षाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है जिससे छात्र एग्जाम फोबिया अर्थात परीक्षा से भय करने करने लगते है और स्थिति और गंभीर हो जाती है।
         परीक्षाओं में तनाव एवं भय को दूर करने के लिए होम्योपैथिक दवाएँ बहुत लाभकारी है यह दवाएं न केवल हमे तनाव से बचाती है बल्कि स्फूर्ति का संचार करती है जिससे छात्रों की पढ़ाई में रुचि बढ़ने लगती है।
       इस संबंध में बिजनौर के कुशल होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ नवनेश कोठारी ने विस्तार से चर्चा की। डॉ कोठारी ने बताया कि परीक्षा के समय थोड़ा तनाव तो छात्र को पढ़ने के लिए प्रेरित करता है परंतु इस तनाव के बढ़ जाने पर यह नुकसानदेह होता है। परीक्षा के समय अत्यधिक तनाव छात्र में डर अथवा भय की स्थिति उत्पन्न कर देता है इसलिए छात्र खुद पर तनाव को हावी न होने दें और इससे बचें।


 छात्र क्या करें
परीक्षा एक सतत प्रक्रिया है बिना वजह भ्रम न पालें
सही समय प्रबंधन के साथ पढ़ाई करें
आशावादी सोच बनाएँ
संतुलित भोजन करें,वसा से परहेज करें
कम से कम 6-7 घण्टे नींद अवश्य लें
लगातार लम्बे समय तक बैठे रहने से बचें तथा बीच बीच में थोड़ा टहलते रहें
टीवी,मोबाइल से दूरी बनाएं, दिन में एक बार बाहर निकलर जरूर टहलें
बिना वजह बिना सलाह कोई भी दवा न लें
पढ़ाई अथवा टॉपिक समझने में दिक्कत होने पर तुरंत अपने शिक्षक से सलाह लें


अभिवावक क्या करें


अभिवावक विशेष सतर्क रहें तथा इस बात का ध्यान रखें कि छात्र के व्यवहार में अंतर तो नही आ रहा
वह रात में सही से सो रहा है या नही
उसका आहार का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है
फोन का उपयोग कम करने दें
बच्चे को कुछ समय बाहर घूमने के लिए प्रेरित करें
एग्जाम फोबिया के लक्षण जैसे सर दर्द,चक्कर आना,नींद न आना,चिड़चिड़ापन,घबराहट,दस्त आदि होने पर तुरंत योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से सलाह लें क्योंकि इस स्थिति में होम्योपैथिक दवाएं सबसे ज्यादा कारगर है।