आसान नहीं होगा भाजपा कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा  तय करना

निकिता ठगुन्ना नई दिल्ली 


दिल्ली में चुनावो की तारीके तय हो गयी है लेकिन भाजपा और कांग्रेस के मुखिया का चेहरा का चयन अभी तक  नहीं हो पाया  है। इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण पार्टी के अंदर की गुटबाजी है। पार्टी के अंदर के अंतरकलह को रोकने के लिए दोनों पार्टिया एक सोची समझी रणनीति के तहत अपने मुख्यमंत्री की  घोषणा नहीं कर पा  रहे है। जहा तक चुनावी भविष्य का सवाल है कांग्रेस की सरकार बनती नहीं दिखती। इस तरह से यह चुनाव आप और भाजपा के बीच  सीधा मुकाबला के रूप में देखा जा रहा है। कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले भी हो सकते है । आप और कांग्रेस का वोट बैंक करीब करीब एक ही है इसलिए कांग्रेस जितनी वोट काटेगी उसका नुकसान आम आदमी पार्टी को होगा। भाजपा इस मंशे से भी काम कर रही है की कांग्रेस अधिक से अधिक वोट काटे जिससे आम आदमी पार्टी  को नुकसान हो। भाजपा में अगर  दावेदारों की बात करे तो आधा दर्जन से अधिक चहरे इस पद की प्रमुखता से दावेदारी कर रहे हैं।.इसमें केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्दन जनता की पहले पसंद है हाल के एक सर्वे में 11 % इनको मुख्यमंत्री के रूप में पसंद किया है। पिछले विधानसभा चुनाव में इन्हे मुख्यमंत्री के चहरे के रूप में इन्हे  प्रोजेक्ट किया था परन्तु पार्टी को आशातीत सफलता नहीं मिली ऐसे में पार्टी इन्हे मुख्यमंत्री  बनाएगी या फिर पूर्व के अनुभव के आधार पर विचार करेगी यह पार्टी का अंदरूनी मामला है अगर विश्वसनीय सूत्रों की माने तो  डॉ हर्ष वर्धन भी प्रदेश की राजनिति  में आने को इस्छुक नहीं हैं। इसके इतर अगर पार्टी यह निर्णय लेती है तो वो मानने को मजबूर होंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल भी मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार है परन्तु  इनका राजनीतिक  जीवन  विवादों में घिरा रहा है। अब पार्टी इनके नाम का रिस्क लेंगे  या नहीं यह कहना संभव नहीं है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मनोज  तिवारी  इस पद के स्वतः दावेदार है। यह सेलिब्रिटी के तोर  पर एक मजबूत चेहरा  है। पूर्वांचल से इनका  नाता है और दिल्ली में पूर्वांचल के मतदातो की संख्या अच्छी खासी है। ऐसे में पार्टी इनपर दाव खेल सकती है परन्तु चूकि यह फिल्म और गायन जगत से जुड़े हुए है इसीलिए इन्हे राजनीती का गहरा ज्ञान नहीं है।  वर्तमान सर्वे में इन्हे एक परसेंट मतदाताओं ने पसंद किया है। विजेंदर गुप्ता प्रदेश भाजपा का एक बड़ा नाम है।  वह दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके है और वर्तमान में दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष है। यह पार्टी के प्रति समर्पित व् जूझारू नेता है इसीलिए इनके नाम की  भरपूर चर्चा है।पश्चिमी दिल्ली के सांसद  प्रवेश वर्मा पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा के पुत्र है परन्तु वह राजनीतिक कौशल  इनमे देखने को नहीं मिलता। ऐसे में पार्टी इनके नाम पर कितना सहमत होती है यह भी  देखना है।  दक्षिण दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी भी मुख्यमंत्री के  के दौड़ में है। यह एक जमीनी नेता है और जनता और कार्यकर्ता  में इनकी मजबूत पकड़ है लेकिन इनके व्यव्हार को लेकर यह चर्चा में रहते हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुभाष आर्य भी  संयुक्त निगम के नेता के रूप में काफी बेहतर कार्य किया हैं तथा संगठन के कई महत्वपूर्ण कार्य किये है। ऐसे मे मुख्यमंत्री पद के लिए इनके नाम पर विचार संभव है। जहा कांग्रेस की बात करें तो पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मौत के बाद दिल्ली प्रदेश कांग्रेस में रिक्तता आ गयी  है। ऐसी स्तिथि में पार्टी को मुख्यमंत्री का  दावेदार तय  करना एक बड़ी चुनौती है। कांग्रेस चुनाव के पूर्व मुख्यमंत्री का चेहरा तय करने की स्तिथि में नहीं है। ऐसे में वर्तमान में जो नाम  है। वह वर्तमान  प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा जिन्हे इस पद के लिए देखा जा  रहा  है। सुभाष चोपड़ा कालका जी से कई बार विधायक भी रहे है और वर्तमान समय में लोगो के बीच जा कर जमीनी मुद्दो को उठा रहे है। दूसरा नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री / प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन भी मुख्यमंत्री पद के रूप में प्रबल दावेदार के रूप में देखे जा रहे है। अगर पार्टी किसी युवा पर विचार करती है तो इसमें राजेश लिलोठिया  का नाम प्रमुखता से देखा जा रहा है। राजेश लिलोठिया ने  कांग्रेस संगठन  के कई महत्वपूर्ण कार्यो  का निर्वाह भी  किया है और  विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके है। तीसरा नाम डॉ योगानंद शास्त्री  का है जो शीला दीक्षित के समय में मंत्री  भी रह चुके है और विधानसभा अध्यक्ष भी रहे है। यह एक अनुभवी नेता भी है इसीलिए पार्टी इन्हे भी यह महत्वपूर्ण जिम्मेवारी दे सकती है। चौथा  महत्वपूर्ण नाम डॉ.अशोक वालिया का है जो कांग्रेस के समय में स्वास्थ मंत्री रहे है और एक अनुभवी नेता के रूप में अपनी पहचान रखी है. भाजपा और कांग्रेस अगर चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं करते तो यह भी एक बड़ा मुद्दा होगा और आम आदमी पार्टी भाजपा और कांग्रेस के अंदर के अंतरकलह को उजागर करेगी परन्तु यह परिपार्टी चलती आयी है। भाजपा ने कई  राज्यों में अपने मुख्यमंत्री के दावेदार पेश किये बगेर  लड़ी और इस बात को जनता के बीच में रख सकते है।